Blogger द्वारा संचालित.

Followers

गुरुवार, 6 नवंबर 2014

कर गंगा-स्नान

गंगा-स्नान/नानक-जयन्ती(कार्त्तिक-पूर्णिमा) की सभी मित्रों को वधाई एवं तन-मन-रूह की शुद्धि हेतु मंगल कामना !
                                           (सारे चित्र' 'गूगल-खोज' से साभार)
नम्बर दो के माल से, कर कुछ सिक्के दान !
मन की धोने मैल तू, कर गंगा-स्नान !!
दाम कमाने के लिए, कर मनमाने काम !
या हाकिम-हुक्काम को, कर ले तनिक सलाम !!
चाहे लूटे किसी को, चाहे काटे जेब |
राम-भगत जो भी करे, होता नहीं फ़रेब ||
योगा कर विख्यात हो, मार बड़ा मैदान !
मन की धोने मैल तू, कर गंगा-स्नान !!1!!
मिली नौकरी, हरि-कृपा, ले तू तगड़ी घूस !
बना आदर्श जोंक को, खून सभी का चूस !!
मोटी पुस्तक हाथ ले, पढ़ कर वित्त बटोर !
जम कर पूजा किया कर, हर दिन सन्ध्या-भोर !!
रंग कर कपड़े गुरु बना, मान उसे भगवान !
मन की धोने मैल तू, कर गंगा-स्नान !!2!!
करके भारी उपद्रव, क्यों है तुझे मलाल ?
क्या उखड़े तेरा, अगर, सैंयाँ है कुतवाल ??
पकड़ गया तो हो गयी, यदि तुझको है जेल |
चिन्ता मत कर, पहुँच से, हो जायेगी वेल ||
प्रभुजी के दरवार में, अधर्म-धर्म समान |

 मन की धोने मैल तू, कर गंगा-स्नान !!3!!

1 टिप्पणी:

  1. प्रभुजी के दरवार में, अधर्म-धर्म समान |
    मन की धोने मैल तू, कर गंगा-स्नान !!
    ....सच माँ में सब कुछ सहन करने के क्षमता है ..
    जय गंगा!

    उत्तर देंहटाएं

About This Blog

साहित्य समाज का दर्पण है |ईमानदारी से देखें तो पता चलेगा कि, सब कुछ मीठा ही तो नहीं , कडवी झाडियाँ उगती चली जा रही हैं,वह भी नीम सी लाभकारी नहीं , अपितु जहरीली | कुछ मीठे स्वाद की विषैली ओषधियाँ भी उग चली हैं | इन पर ईमानदारी से दृष्टि-पात करें |तुष्टीकरण के फेर में आलोचना को कहीं हम दफ़न तो नहीं कर दे रहे हैं !!

मेरे सभी ब्लोग्ज-

प्रसून

साहित्य प्रसून

गज़ल कुञ्ज

ज्वालामुखी

जलजला


  © Blogger template Shush by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP